सोमवार: भगवान शिव, चंद्र देव की पूजा, मंत्र और व्रत कथा
सोमवार भगवान शिव और चंद्र देव का दिन है। "सोम" चंद्रमा का नाम है, जिसे शिव जी अपने मस्तक पर धारण करते हैं।
सोमवार के मंत्र
भगवान शिव
शिव पंचाक्षर मंत्र
अर्थ: मंगलमय भगवान शिव को नमस्कार। "न-मः-शि-वा-य" ये पाँच अक्षर पंचाक्षर कहलाते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
अर्थ: हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पोषण बढ़ाने वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका ककड़ी का फल बेल से अपने आप अलग हो जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरता से नहीं।
रुद्र गायत्री मंत्र
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम उस परम पुरुष को जानें, महादेव का ध्यान करें; वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
चंद्र देव
चंद्र बीज मंत्र
अर्थ: श्रां, श्रीं, श्रौं चंद्र के बीज अक्षर हैं; इनके साथ चंद्र देव को नमस्कार।
चंद्र मूल मंत्र
अर्थ: "सोम" यानी चंद्र देव को नमस्कार।
सोमवार की पूजा विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और शिव मंदिर जाएँ या घर में शिवलिंग की पूजा करें।
- शिवलिंग पर जल, फिर दूध, फिर जल चढ़ाएँ ("ॐ नमः शिवाय" बोलते हुए)।
- बेलपत्र (तीन पत्तों वाला, उल्टी तरफ़ से), धतूरा, सफ़ेद फूल और चंदन अर्पित करें।
- शिव चालीसा या शिव आरती पढ़ें और सोमवार व्रत कथा सुनें।
- शाम को व्रत खोलें; चाहें तो चंद्र दर्शन करके चंद्र मंत्र बोलें।
क्या करें
- शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएँ।
- सफ़ेद वस्त्र पहनें और दूध, चावल का दान करें।
- माँ और बड़ी स्त्रियों का आदर करें; चंद्र की शांति के लिए यह शुभ माना जाता है।
क्या न करें
- शिवलिंग पर तुलसी, हल्दी और केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता।
- शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती; जलधारी (जल निकलने की जगह) को लाँघा नहीं जाता।
सोमवार व्रत कथा
एक नगर में एक धनी साहूकार रहता था, जिसके कोई संतान नहीं थी। वह हर सोमवार श्रद्धा से शिव जी का व्रत और पूजा करता था।
माता पार्वती के आग्रह पर शिव जी ने उसे पुत्र का वरदान दिया, पर कहा कि बालक की आयु केवल बारह वर्ष होगी। साहूकार ने यह बात किसी को नहीं बताई और व्रत करता रहा। ग्यारह वर्ष का होने पर उसने पुत्र को मामा के साथ पढ़ने काशी भेज दिया।
रास्ते में एक नगर में राजकुमारी का विवाह था। दूल्हा एक आँख से काना था, इसलिए उसके पिता ने धोखे से साहूकार के सुंदर बेटे को दूल्हा बनाकर विवाह करा दिया। ईमानदार बालक ने राजकुमारी की चुनरी पर सच लिख दिया और आगे काशी चला गया।
बारहवें वर्ष में काशी में बालक की मृत्यु हो गई। मामा का विलाप सुनकर माता पार्वती ने शिव जी से कहा कि यह उसी साहूकार का पुत्र है जो इतनी श्रद्धा से व्रत करता है। शिव जी ने बालक को जीवनदान दिया। लौटते समय राजकुमारी के पिता ने उसे पहचानकर बेटी के साथ विदा किया, और साहूकार का घर खुशियों से भर गया।
यह पारंपरिक लोक कथा का रामकृपा द्वारा अपने शब्दों में लिखा सार है।
सोमवार के पाठ
सवाल-जवाब
सोमवार को किस भगवान की पूजा होती है?
सोमवार भगवान शिव और चंद्र देव का दिन है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं।
सोलह सोमवार व्रत क्या है?
लगातार सोलह सोमवार शिव जी का व्रत रखने को सोलह सोमवार व्रत कहते हैं। इसकी पूरी कथा और विधि इस साइट पर अलग से दी गई है।
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