श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:01 PMIST
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शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा)

भगवान शिव · आरती

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आरती

शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा)

भगवान शिव
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शिव आरती (ॐ जय शिव ओंकारा)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

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ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी सुख संपति पावे॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Om jay shiv onkara, svami jay shiv onkara|
brahma vishnu sadashiv, arddhangi dhara||

ekanan chaturanan panchanan raje|
hansasan garurasan vrishavahan saje||

do bhuj char chaturbhuj dasabhuj ati sohe|
trigun rup nirakhate tribhuvan jan mohe||

akshamala vanamala mundamala dhari|
tripurari kansari kar mala dhari||

shvetambar pitambar baghambar ange|
sanakadik garunadik bhutadik sange||

kar ke madhya kamandalu chakra trishuladhari|
sukhakari dukhahari jagapalan kari||

brahma vishnu sadashiv janat aviveka|
pranavakshar men shobhit ye tinon eka||

trigunasvami ji ki arati jo koi nar gave|
kahat shivananda svami sukh sampati pave||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

भगवान शिव की प्रसिद्ध आरती।

महत्व

सोमवार और शिवरात्रि पूजा के अंत में।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।