परिचय
ऋग्वेद और यजुर्वेद में आने वाला भगवान शिव (त्र्यंबक) का मंत्र।
महत्व
भक्त इसे भय और रोग के समय शांति के लिए जपते हैं।
पाठ विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
- घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
- पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
- पाठ के बाद भगवान शिव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
- सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।
