श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:03 PMIST
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महामृत्युंजय मंत्र

भगवान शिव · मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

अर्थ

हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और पोषण बढ़ाने वाले शिव की पूजा करते हैं। जैसे पका फल बेल से अपने आप छूट जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमरत्व से नहीं।

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Om tryambakam yajamahe sugandhim pushtivardhanam|
urvarukamiva bandhananmrityormukshiya mamritat||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

ऋग्वेद और यजुर्वेद में आने वाला भगवान शिव (त्र्यंबक) का मंत्र।

महत्व

भक्त इसे भय और रोग के समय शांति के लिए जपते हैं।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान शिव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।