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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:08 PMIST
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शिवाष्टकम् (प्रभुं प्राणनाथं)

भगवान शिव · स्तोत्र

स्तोत्र

शिवाष्टकम् (प्रभुं प्राणनाथं)

भगवान शिव
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शिवाष्टकम् (प्रभुं प्राणनाथं)

प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजाम्।
भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥१॥

गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकालकालं गणेशादिपालम्।
जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥२॥

मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम्।
अनादिं ह्यपारं महामोहमारं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥३॥

वटाधोनिवासं महाट्टाट्टहासं महापापनाशं सदा सुप्रकाशम्।
गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥४॥

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प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजाम्।
भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥१॥

गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकालकालं गणेशादिपालम्।
जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥२॥

मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम्।
अनादिं ह्यपारं महामोहमारं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥३॥

वटाधोनिवासं महाट्टाट्टहासं महापापनाशं सदा सुप्रकाशम्।
गिरीशं गणेशं सुरेशं महेशं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥४॥

गिरीन्द्रात्मजासङ्गृहीतार्धदेहं गिरौ संस्थितं सर्वदापन्नगेहम्।
परब्रह्म ब्रह्मादिभिर्वन्द्यमानं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥५॥

कपालं त्रिशूलं कराभ्यां दधानं पदाम्भोजनम्राय कामं ददानम्।
बलीवर्दयानं सुराणां प्रधानं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥६॥

शरच्चन्द्रगात्रं गणानन्दपात्रं त्रिनेत्रं पवित्रं धनेशस्य मित्रम्।
अपर्णाकलत्रं सदा सच्चरित्रं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥७॥

हरं सर्पहारं चिताभूविहारं भवं वेदसारं सदा निर्विकारम्।
श्मशाने वसन्तं मनोजं दहन्तं शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे ॥८॥

स्तवं यः प्रभाते नरः शूलपाणेः पठेत् स्तोत्ररत्नं त्विहप्राप्यरत्नम्।
सुपुत्रं सुधान्यं सुमित्रं कलत्रं विचित्रैः समाराध्य मोक्षं प्रयाति ॥९॥

॥इति श्रीशिवाष्टकं सम्पूर्णम्॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

prabhum prananatham vibhum vishvanatham jagannathanatham sadanandabhajam|
bhavadbhavyabhuteshvaram bhutanatham shivam shankaram shambhumishanamide ||1||

gale rundamalam tanau sarpajalam mahakalakalam ganeshadipalam|
jatajutagangottarangairvishalam shivam shankaram shambhumishanamide ||2||

mudamakaram mandanam mandayantam mahamandalam bhasmabhushadharam tam|
anadim hyaparam mahamohamaram shivam shankaram shambhumishanamide ||3||

vatadhonivasam mahattattahasam mahapapanasham sada suprakasham|
girisham ganesham suresham mahesham shivam shankaram shambhumishanamide ||4||

girindratmajasangrihitardhadeham girau sansthitam sarvadapannageham|
parabrahma brahmadibhirvandyamanam shivam shankaram shambhumishanamide ||5||

kapalam trishulam karabhyam dadhanam padambhojanamraya kamam dadanam|
balivardayanam suranam pradhanam shivam shankaram shambhumishanamide ||6||

sharachchandragatram gananandapatram trinetram pavitram dhaneshasya mitram|
aparnakalatram sada sachcharitram shivam shankaram shambhumishanamide ||7||

haram sarpaharam chitabhuviharam bhavam vedasaram sada nirvikaram|
shmashane vasantam manojam dahantam shivam shankaram shambhumishanamide ||8||

stavam yah prabhate narah shulapaneh pathet stotraratnam tvihaprapyaratnam|
suputram sudhanyam sumitram kalatram vichitraih samaradhya moksham prayati ||9||

||iti shrishivashtakam sampurnam||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

"शिवं शङ्करं शम्भुमीशानमीडे" की टेक वाला प्रसिद्ध शिवाष्टकम्।

महत्व

सोमवार और सावन में इसका पाठ लोकप्रिय है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान शिव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।