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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:59 PMIST
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शिव चालीसा

भगवान शिव · चालीसा · अयोध्यादास (चालीसा में नाम)

चालीसा

शिव चालीसा

भगवान शिव
रचना: अयोध्यादास (चालीसा में नाम)
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शिव चालीसा
दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

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दोहा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देखि नाग मन मोहे॥
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद माहि महिमा तुम गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला। जरत सुरासुर भए विहाला॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। येहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट ते मोहि आन उबारो॥
मात-पिता भ्राता सब होई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु मम संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदा हीं। जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। शारद नारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमः शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पर होत है शम्भु सहाई॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र होन कर इच्छा जोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा। ताके तन नहीं रहै कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्त धाम शिवपुर में पावे॥
कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

दोहा

नित्त नेम उठि प्रातः ही, पाठ करो चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

मगसिर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
स्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Doha

jay ganesh girija suvan, mangal mul sujan|
kahat ayodhyadas tum, dehu abhay varadan||

Chaupai

jay girija pati din dayala| sada karat santan pratipala||
bhal chandrama sohat nike| kanan kundal nagaphani ke||
ang gaur shir gang bahaye| mundamal tan kshar lagae||
vastra khal baghambar sohe| chhavi ko dekhi nag man mohe||
maina matu ki have dulari| bam ang sohat chhavi nyari||
kar trishul sohat chhavi bhari| karat sada shatrun kshayakari||
nandi ganesh sohai tahan kaise| sagar madhya kamal hain jaise||
kartik shyam aur ganarau| ya chhavi ko kahi jat na kau||
devan jabahin jay pukara| tab hi dukh prabhu ap nivara||
kiya upadrav tarak bhari| devan sab mili tumahin juhari||
turat shadanan ap pathayau| lavanimesh mahan mari girayau||
ap jalandhar asur sanhara| suyash tumhar vidit sansara||
tripurasur san yuddha machai| sabahin kripa kar lin bachai||
kiya tapahin bhagirath bhari| purab pratigya tasu purari||
danin mahan tum sam kou nahin| sevak stuti karat sadahin||
ved mahi mahima tum gai| akath anadi bhed nahin pai||
prakati udadhi manthan men jvala| jarat surasur bhae vihala||
kinhi daya tahan kari sahai| nilakantha tab nam kahai||
pujan ramachandra jab kinha| jit ke lank vibhishan dinha||
sahas kamal men ho rahe dhari| kinha pariksha tabahin purari||
ek kamal prabhu rakheu joi| kamal nayan pujan chahan soi||
kathin bhakti dekhi prabhu shankar| bhae prasanna die ichchhit var||
jay jay jay ananta avinashi| karat kripa sab ke ghatavasi||
dushta sakal nit mohi satavai| bhramat rahaun mohi chain na avai||
trahi trahi main nath pukaro| yehi avasar mohi an ubaro||
lai trishul shatrun ko maro| sankat te mohi an ubaro||
mat-pita bhrata sab hoi| sankat men puchhat nahin koi||
svami ek hai as tumhari| ay harahu mam sankat bhari||
dhan nirdhan ko det sada hin| jo koi janche so phal pahin||
astuti kehi vidhi karain tumhari| kshamahu nath ab chuk hamari||
shankar ho sankat ke nashan| mangal karan vighna vinashan||
yogi yati muni dhyan lagavain| sharad narad shish navavain||
namo namo jay namah shivay| sur brahmadik par na pay||
jo yah path kare man lai| ta par hot hai shambhu sahai||
riniyan jo koi ho adhikari| path kare so pavan hari||
putra hon kar ichchha joi| nishchay shiv prasad tehi hoi||
pandit trayodashi ko lave| dhyan purvak hom karave||
trayodashi vrat karai hamesha| take tan nahin rahai kalesha||
dhup dip naivedya charhave| shankar sammukh path sunave||
janma janma ke pap nasave| anta dham shivapur men pave||
kahain ayodhyadas as tumhari| jani sakal duhkh harahu hamari||

Doha

nitta nem uthi pratah hi, path karo chalisa|
tum meri manokamana, purna karo jagadish||

magasir chhathi hemanta ritu, sanvat chausath jan|
stuti chalisa shivahi, purna kin kalyan||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

भगवान शिव की महिमा का वर्णन करने वाली चालीसा।

महत्व

सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि पर इसका पाठ किया जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान शिव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।

सवाल-जवाब

शिव चालीसा कब पढ़ें?

सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि और सावन में इसका पाठ विशेष माना जाता है।

पाठ के साथ क्या करें?

शिवलिंग पर जल या दूध चढ़ाकर, बेलपत्र अर्पित करके और "ॐ नमः शिवाय" का जाप करके पाठ करने की परंपरा है।