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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:25 PMIST
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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

भगवान शिव · स्तोत्र · आदि शंकराचार्य

स्तोत्र

शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

भगवान शिव
रचना: आदि शंकराचार्य
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शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्
श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम्

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥१॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥२॥

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श्री शिव पंचाक्षर स्तोत्रम् नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥१॥

मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय
नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय।
मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय
तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥२॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द-
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय
तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥३॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य-
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय
तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥४॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय
पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय
तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥५॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥इति श्रीमच्छङ्कराचार्यविरचितं श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

सरल अर्थ यह स्तोत्र "नमः शिवाय" के पाँच अक्षरों (न, म, शि, वा, य) पर आधारित है; हर श्लोक एक अक्षर से शिव जी को नमन करता है। पहले श्लोक में नागों का हार और तीन नेत्र धारण करने वाले, भस्म लगाए, नित्य, शुद्ध और दिगंबर महेश्वर को नमस्कार है। दूसरे में गंगाजल और चंदन से पूजित, नंदी और गणों के स्वामी, मंदार के फूलों से पूजे जाने वाले शिव को नमन है। तीसरे में माँ गौरी के मुख-कमल को खिलाने वाले सूर्य जैसे, दक्ष के यज्ञ का नाश करने वाले नीलकंठ को नमन है। चौथे में वसिष्ठ, अगस्त्य, गौतम जैसे ऋषियों से पूजित, सूर्य-चंद्र-अग्नि रूपी नेत्रों वाले शिव को नमन है। पाँचवें में जटाधारी, पिनाक धनुष धारण करने वाले सनातन देव को नमन है। अंतिम श्लोक में कहा है कि शिव के पास इसका पाठ करने वाला शिवलोक पाता है।

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Shri Shiv Panchakshar Stotram

nagendraharaya trilochanaya
bhasmangaragaya maheshvaraya|
nityaya shuddhaya digambaraya
tasmai nakaraya namah shivaya||1||

mandakinisalilachandanacharchitaya
nandishvarapramathanathamaheshvaraya|
mandarapushpabahupushpasupujitaya
tasmai makaraya namah shivaya||2||

shivaya gaurivadanabjavrinda-
suryaya dakshadhvaranashakaya|
shrinilakanthaya vrishadhvajaya
tasmai shikaraya namah shivaya||3||

vasishthakumbhodbhavagautamarya-
munindradevarchitashekharaya|
chandrarkavaishvanaralochanaya
tasmai vakaraya namah shivaya||4||

yakshasvarupaya jatadharaya
pinakahastaya sanatanaya|
divyaya devaya digambaraya
tasmai yakaraya namah shivaya||5||

panchaksharamidam punyam yah pathechchhivasannidhau|
shivalokamavapnoti shivena saha modate||

||iti shrimachchhankaracharyavirachitam shrishivapanchaksharastotram sampurnam||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

"नमः शिवाय" के पाँच अक्षरों पर आधारित आदि शंकराचार्य का प्रसिद्ध स्तोत्र, सरल अर्थ सहित।

महत्व

सोमवार, प्रदोष और शिवरात्रि पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान शिव के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान शिव का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. सोमवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।