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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:36 PMIST
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चंद्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक)

चंद्र देव · सोमवार

दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम् ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥

dadhishankhatusharabham kshirodarnavasambhavam |
namami shashinam somam shambhormukutabhushanam ||

अर्थ

दही, शंख और बर्फ़ जैसे उजले, क्षीरसागर से उत्पन्न, भगवान शिव के मुकुट के आभूषण, उन सोम (चंद्र) को मैं नमस्कार करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

नवग्रह शांति के पाठ में चंद्र के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और चंद्र देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; सोमवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 11,000 बार (लगभग 102 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद चावल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

चंद्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से सोमवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

चंद्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 11,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

चंद्र नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?

दही, शंख और बर्फ़ जैसे उजले, क्षीरसागर से उत्पन्न, भगवान शिव के मुकुट के आभूषण, उन सोम (चंद्र) को मैं नमस्कार करता हूँ।

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