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नवग्रह मंत्र: बीज मंत्र, जाप संख्या, दिन और दान
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु: हर ग्रह का बीज मंत्र, पौराणिक श्लोक, दिन, रंग, दिशा, दान और शांति के लिए जाप संख्या।
नवग्रह शांति मंत्र (सभी ग्रहों के लिए)
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ॥
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु ॥
अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि), शिव (त्रिपुरांतक), सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, ये सभी ग्रह और देवता मेरे लिए शांति देने वाले हों।
📿 इसका जाप करें| ग्रह | बीज मंत्र | दिन, रंग, दिशा | जाप संख्या | दान |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य देव | ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः । | रविवार लाल, केसरिया · पूर्व | 7,000 | गेहूँ, गुड़, ताँबा, लाल वस्त्र, लाल चंदन |
| चंद्र देव | ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः । | सोमवार सफ़ेद · उत्तर-पश्चिम | 11,000 | चावल, दूध, चाँदी, सफ़ेद वस्त्र, मिश्री |
| मंगल देव | ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः । | मंगलवार लाल · दक्षिण | 10,000 | मसूर की दाल, लाल वस्त्र, गुड़, ताँबा |
| बुध देव | ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः । | बुधवार हरा · उत्तर | 9,000 | हरी मूँग, हरे वस्त्र, हरी सब्ज़ियाँ, काँसा |
| बृहस्पति देव | ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः । | गुरुवार पीला · उत्तर-पूर्व | 19,000 | चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केसर, किताबें |
| शुक्र देव | ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः । | शुक्रवार सफ़ेद, हल्का गुलाबी · दक्षिण-पूर्व | 16,000 | चावल, घी, सफ़ेद वस्त्र, इत्र, चीनी |
| शनि देव | ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः । | शनिवार काला, गहरा नीला · पश्चिम | 23,000 | काले तिल, उड़द, सरसों का तेल, लोहा, कंबल |
| राहु | ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः । | शनिवार नीला, धूसर · दक्षिण-पश्चिम | 18,000 | नारियल, काले तिल, नीला वस्त्र, सरसों |
| केतु | ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः । | शनिवार धूसर, चितकबरा · दक्षिण-पश्चिम | 17,000 | कंबल, सप्तधान्य, काले-सफ़ेद तिल |
जाप संख्या ग्रह शांति के पारंपरिक संकल्प की है (हर ग्रह की विंशोत्तरी दशा के वर्षों × 1,000), जो कई दिनों में पूरी की जाती है। रोज़ के लिए एक माला (108) काफ़ी है। अपनी कुंडली के अनुसार किसी योग्य पंडित से सलाह लें।
