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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:52 PMIST
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केतु बीज मंत्र

केतु · शनिवार और मंगलवार

ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः ।

Om sram srim sraum sah ketave namah |

अर्थ

स्रां, स्रीं, स्रौं केतु के बीज अक्षर हैं; इनके साथ केतु को नमस्कार।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

केतु की महादशा में इसे 17,000 बार जपने की परंपरा है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; धूसर, चितकबरा रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और केतु का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार और मंगलवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 17,000 बार (लगभग 158 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद कंबल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

केतु बीज मंत्र कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार और मंगलवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

केतु बीज मंत्र कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 17,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

केतु बीज मंत्र का अर्थ क्या है?

स्रां, स्रीं, स्रौं केतु के बीज अक्षर हैं; इनके साथ केतु को नमस्कार।

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