केतु नवग्रह मंत्र (पौराणिक)
केतु · शनिवार और मंगलवार
पलाशपुष्पसङ्काशं तारकाग्रहमस्तकम् ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ॥
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ॥
palashapushpasankasham tarakagrahamastakam |
raudram raudratmakam ghoram tam ketum pranamamyaham ||
अर्थ
पलाश के फूल जैसे रंग वाले, तारों और ग्रहों में प्रमुख, उग्र स्वभाव वाले, भयंकर केतु को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
नवग्रह शांति के पाठ में केतु के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; धूसर, चितकबरा रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और केतु का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार और मंगलवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 17,000 बार (लगभग 158 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद कंबल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
केतु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार और मंगलवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
केतु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 17,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
केतु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?
पलाश के फूल जैसे रंग वाले, तारों और ग्रहों में प्रमुख, उग्र स्वभाव वाले, भयंकर केतु को मैं प्रणाम करता हूँ।
