शनिवार: शनि देव, हनुमान जी, राहु, केतु की पूजा, मंत्र और व्रत कथा
शनिवार शनि देव का दिन है। हनुमान जी की पूजा भी इस दिन विशेष है, क्योंकि मान्यता है कि हनुमान भक्तों को शनि देव कष्ट नहीं देते। राहु-केतु की शांति भी शनिवार को की जाती है।
| देवता | शनि देव, हनुमान जी, राहु, केतु |
|---|---|
| शुभ रंग | काला, गहरा नीला |
| दान | काले तिल, उड़द, सरसों का तेल, लोहा, कंबल |
शनिवार के मंत्र
शनि देव
शनि मूल मंत्र
अर्थ: "शं" शनि का बीज अक्षर है; धीरे चलने वाले शनैश्चर देव को नमस्कार।
शनि बीज मंत्र
अर्थ: प्रां, प्रीं, प्रौं शनि के बीज अक्षर हैं; इनके साथ शनि देव को नमस्कार।
हनुमान जी
हनुमान मूल मंत्र
अर्थ: "हं" हनुमान जी का बीज अक्षर है; इसके साथ हनुमान जी को नमस्कार।
हनुमान गायत्री मंत्र
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात् ॥
अर्थ: हम अंजनी पुत्र को जानें, पवन पुत्र का ध्यान करें; वे हनुमान जी हमें प्रेरणा दें।
मनोजवं (हनुमान वंदना)
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
अर्थ: जो मन जैसे तेज़ और पवन जैसे वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, पवन के पुत्र, वानर सेना के प्रमुख, श्री राम के दूत, मैं उनकी शरण लेता हूँ।
राहु
राहु बीज मंत्र
अर्थ: भ्रां, भ्रीं, भ्रौं राहु के बीज अक्षर हैं; इनके साथ राहु को नमस्कार।
केतु
केतु बीज मंत्र
अर्थ: स्रां, स्रीं, स्रौं केतु के बीज अक्षर हैं; इनके साथ केतु को नमस्कार।
शनिवार की पूजा विधि
- स्नान करके काले या गहरे नीले वस्त्र पहनें।
- शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएँ और सात परिक्रमा करें।
- शनि मंदिर में शनि देव पर सरसों का तेल चढ़ाएँ (मूर्ति की आँखों में न देखें, ऐसी परंपरा है)।
- शनि चालीसा या हनुमान चालीसा पढ़ें और शनि मंत्र का जाप करें।
- काले तिल, उड़द, सरसों का तेल या कंबल का ज़रूरतमंदों को दान करें।
क्या करें
- पीपल के नीचे दीपक जलाएँ।
- मज़दूरों, बुज़ुर्गों और ज़रूरतमंदों की मदद करें; शनि को कर्म का देवता माना जाता है।
- हनुमान चालीसा पढ़ें।
क्या न करें
- परंपरा में शनिवार को लोहा, तेल, नमक और काले तिल खरीदने से बचने की मान्यता है।
- किसी का अपमान या बेईमानी न करें; शनि देव कर्म का फल देते हैं।
शनिवार व्रत कथा
एक बार नवग्रहों में विवाद हुआ कि सबसे बड़ा कौन है। वे न्याय के लिए राजा विक्रमादित्य के पास गए। राजा ने नौ धातुओं के सिंहासन बनवाए और कहा कि जो जिस क्रम में बैठे, वही उसका स्थान है। लोहे का सिंहासन सबसे पीछे था, जो शनि देव को मिला। शनि देव नाराज़ हो गए।
शनि की साढ़ेसाती राजा पर आई। एक घोड़ा व्यापारी बनकर आए शनि देव का घोड़ा राजा को लेकर उड़ गया और दूर देश में छोड़ गया। वहाँ एक सेठ के घर में खूँटी हार निगल गई, और राजा पर चोरी का आरोप लगा। उन्हें कठोर दंड मिला और वे एक तेली के यहाँ कोल्हू चलाने लगे।
एक रात राजा ने राग दीपक गाया, तो वहाँ की राजकुमारी उनके संगीत पर मोहित हो गई और उनसे विवाह कर लिया। उसी रात शनि देव ने स्वप्न में दर्शन दिए। राजा ने कहा: जितना कष्ट मुझे दिया, उतना किसी और को न देना। शनि देव ने वचन दिया कि जो शनिवार को व्रत और कथा करेगा, उसे वे कष्ट नहीं देंगे।
शनि देव की कृपा से खूँटी ने हार वापस उगल दिया, राजा का सम्मान लौट आया और वे अपने राज्य लौटे। उन्होंने पूरे राज्य में शनिवार व्रत की घोषणा करवाई।
यह पारंपरिक लोक कथा का रामकृपा द्वारा अपने शब्दों में लिखा सार है।
शनिवार के पाठ
सवाल-जवाब
शनिवार को किस भगवान की पूजा होती है?
शनिवार शनि देव का दिन है। हनुमान जी की पूजा भी इस दिन विशेष मानी जाती है, और राहु-केतु की शांति भी शनिवार को की जाती है।
शनिवार को पीपल पर दीपक क्यों जलाते हैं?
मान्यता है कि पीपल में देवताओं का वास है और शनिवार की शाम पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि की पीड़ा कम होती है।
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