मनोजवं (हनुमान वंदना)
हनुमान जी · मंगलवार और शनिवार
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥
manojavam marutatulyavegam jitendriyam buddhimatam varishtham |
vatatmajam vanarayuthamukhyam shriramadutam sharanam prapadye ||
अर्थ
जो मन जैसे तेज़ और पवन जैसे वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, पवन के पुत्र, वानर सेना के प्रमुख, श्री राम के दूत, मैं उनकी शरण लेता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
यह श्लोक राम रक्षा स्तोत्र में भी आता है; यात्रा या किसी काम की शुरुआत में इसे बोला जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल, केसरिया रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और हनुमान जी का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद गुड़ जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
मनोजवं (हनुमान वंदना) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
मनोजवं (हनुमान वंदना) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
मनोजवं (हनुमान वंदना) का अर्थ क्या है?
जो मन जैसे तेज़ और पवन जैसे वेगवान हैं, जिन्होंने इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में श्रेष्ठ हैं, पवन के पुत्र, वानर सेना के प्रमुख, श्री राम के दूत, मैं उनकी शरण लेता हूँ।
