श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:02 PMIST
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हनुमान आरती

हनुमान जी · आरती

🪔 दीपक, घंटी के साथ ऑनलाइन आरती करें

आरती

हनुमान आरती

हनुमान जी
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हनुमान आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

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आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज सँवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पाताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएँ भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसि बैकुंठ परमपद पावे॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

arati kijai hanuman lala ki|
dushta dalan raghunath kala ki||

jake bal se girivar kanpe|
rog dosh jake nikat na jhanke||

anjani putra maha baladai|
santan ke prabhu sada sahai||

de bira raghunath pathae|
lanka jari siya sudhi lae||

lanka so kot samudra si khai|
jat pavanasut bar na lai||

lanka jari asur sanhare|
siyaramaji ke kaj sanvare||

lakshman murchhit pare sakare|
ani sanjivan pran ubare||

paithi patal tori jam-kare|
ahiravan ki bhuja ukhare||

baen bhuja asur dal mare|
dahine bhuja santajan tare||

sur nar muni arati utaren|
jay jay jay hanuman ucharen||

kanchan thar kapur lau chhai|
arati karat anjana mai||

jo hanumanaji ki arati gave|
basi baikunth paramapad pave||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

हनुमान जी की प्रसिद्ध आरती।

महत्व

मंगलवार और शनिवार को।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. मंगलवार और शनिवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।