श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:06 PMIST
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बजरंग बाण

हनुमान जी · पाठ और कथा · परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है

पाठ और कथा

बजरंग बाण

हनुमान जी
रचना: परंपरा में गोस्वामी तुलसीदास से जोड़ा जाता है
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बजरंग बाण
दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥

बाग उजारि सिन्धु महं बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा॥

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दोहा

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥

चौपाई

जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिन्धु महं बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होइ दुःख करहुं निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
सत्य होउ हरि शपथ पायके। रामदूत धरु मारु धाय के॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥
पाय परौं कर जोरि मनावों। यह अवसर अब केहि गोहरावों॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल काल मारीमर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा॥
चरण शरण करि जोरि मनावों। यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल। ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो॥
यहि बजरंग बाण जेहि मारो। ताहि कहो फिर कौन उबारो॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै। तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहे कलेशा॥

दोहा

प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Doha

nishchay prem pratiti te, binay karai sanaman|
tehi ke karaj sakal shubh, siddha karai hanuman||

Chaupai

jay hanumanta santa hitakari| suni lijai prabhu araj hamari||
jan ke kaj vilamba na kijai| atur dauri maha sukh dijai||
jaise kudi sindhu vahi para| surasa badan paithi bistara||
age jay lankini roka| marehu lat gai sur loka||
jay vibhishan ko sukh dinha| sita nirakhi param pad linha||
bag ujari sindhu mahan bora| ati atur yam katar tora||
akshay kumar mari sanhara| lum lapeti lank ko jara||
lah saman lank jari gai| jay jay dhuni sur pur mahan bhai||
ab vilamba kehi karan svami| kripa karahun ur antaryami||
jay jay lakshman pran ke data| atur hoi duhkh karahun nipata||
jay giridhar jay jay sukh sagar| sur samuh samarath bhatanagar||
Om hanu hanu hanu hanu hanumanta hathile| bairihin maru bajra ki kile||
gada bajra lai bairihin maro| maharaj prabhu das ubaro||
Omkar hunkar mahaprabhu dhavo| bajra gada hanu vilamba na lavo||
Om hrin hrin hrin hanumanta kapisa| Om hun hun hun hanu ari ur shisha||
satya hou hari shapath payake| ramadut dharu maru dhay ke||
jay jay jay hanumanta agadha| duhkh pavat jan kehi aparadha||
puja jap tap nem achara| nahin janat kachhu das tumhara||
van upavan mag giri grih mahin| tumare bal ham darapat nahin||
pay paraun kar jori manavon| yah avasar ab kehi goharavon||
jay anjani kumar balavanta| shankar suvan dhir hanumanta||
badan karal kal kul ghalak| ram sahay sada pratipalak||
bhut pret pishach nishachar| agni baital kal marimar||
inhen maru tohi shapath ram ki| rakhu nath marajad nam ki||
janakasuta hari das kahavo| taki shapath vilamba na lavo||
jay jay jay dhuni hot akasha| sumirat hot dusah duhkh nasha||
charan sharan kari jori manavon| yahi avasar ab kehi goharavon||
uthu uthu chalu tohin ram duhai| pany paraun kar jori manai||
Om chan chan chan chan chapal chalanta| Om hanu hanu hanu hanu hanumanta||
Om han han hank det kapi chanchal| Om san san saham parane khal dal||
apane jan ko turat ubaro| sumirat hoy ananda hamaro||
yahi bajarang ban jehi maro| tahi kaho phir kaun ubaro||
path karai bajarang ban ki| hanumat raksha karai pran ki||
yah bajarang ban jo japai| tehi te bhut pret sab kampe||
dhup dey aru japai hamesha| take tan nahin rahe kalesha||

Doha

prem pratitihin kapi bhajai, sada dharai ur dhyan|
tehi ke karaj sakal shubh, siddha karai hanuman||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

हनुमान जी से संकट दूर करने की प्रबल प्रार्थना, जिसमें उनकी लंका यात्रा का भी स्मरण है।

महत्व

मंगलवार और शनिवार को, और किसी बड़े संकट के समय इसका पाठ करने की परंपरा है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद हनुमान जी का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. मंगलवार और शनिवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।