अतुलितबलधामं (सुंदरकांड मंगलाचरण)
हनुमान जी · मंगलवार और शनिवार
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥
atulitabaladhamam hemashailabhadeham danujavanakrishanum gyaninamagraganyam |
sakalagunanidhanam vanaranamadhisham raghupatipriyabhaktam vatajatam namami ||
अर्थ
अपार बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे शरीर वाले, राक्षस रूपी वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में सबसे आगे, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, श्री राम के प्रिय भक्त पवनपुत्र को मैं नमस्कार करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
गोस्वामी तुलसीदास जी ने सुंदरकांड की शुरुआत इसी श्लोक से की है; सुंदरकांड पाठ से पहले इसे पढ़ा जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल, केसरिया रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और हनुमान जी का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद गुड़ जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
अतुलितबलधामं (सुंदरकांड मंगलाचरण) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
अतुलितबलधामं (सुंदरकांड मंगलाचरण) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
अतुलितबलधामं (सुंदरकांड मंगलाचरण) का अर्थ क्या है?
अपार बल के धाम, सोने के पर्वत जैसे शरीर वाले, राक्षस रूपी वन के लिए अग्नि, ज्ञानियों में सबसे आगे, सब गुणों के भंडार, वानरों के स्वामी, श्री राम के प्रिय भक्त पवनपुत्र को मैं नमस्कार करता हूँ।
