राहु नवग्रह मंत्र (पौराणिक)
राहु · शनिवार
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम् ।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥
ardhakayam mahaviryam chandradityavimardanam |
sinhikagarbhasambhutam tam rahum pranamamyaham ||
अर्थ
आधे शरीर वाले, महा पराक्रमी, सूर्य और चंद्र को ग्रसने वाले, सिंहिका के पुत्र राहु को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
नवग्रह शांति के पाठ में राहु के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; नीला, धूसर रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और राहु का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शनिवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 18,000 बार (लगभग 167 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद नारियल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
राहु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शनिवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
राहु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 18,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
राहु नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?
आधे शरीर वाले, महा पराक्रमी, सूर्य और चंद्र को ग्रसने वाले, सिंहिका के पुत्र राहु को मैं प्रणाम करता हूँ।
