रुद्र गायत्री मंत्र
भगवान शिव · सोमवार
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि ।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
Om tatpurushaya vidmahe mahadevaya dhimahi |
tanno rudrah prachodayat ||
अर्थ
हम उस परम पुरुष को जानें, महादेव का ध्यान करें; वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
मन की शांति और एकाग्रता के लिए इसका जाप किया जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, हल्का नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान शिव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; सोमवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद दूध जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
रुद्र गायत्री मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से सोमवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
रुद्र गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
रुद्र गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?
हम उस परम पुरुष को जानें, महादेव का ध्यान करें; वे रुद्र हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
