कर्पूरगौरं (शिव स्तुति)
भगवान शिव · सोमवार
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥
karpuragauram karunavataram sansarasaram bhujagendraharam |
sada vasantam hridayaravinde bhavam bhavanisahitam namami ||
अर्थ
कपूर जैसे गोरे, करुणा के अवतार, संसार के सार, साँपों का हार पहनने वाले, जो सदा हृदय-कमल में बसते हैं, उन भगवान शिव को माता पार्वती सहित मैं नमस्कार करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
आरती के बाद यह श्लोक बोलने की परंपरा है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; सफ़ेद, हल्का नीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान शिव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; सोमवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद दूध जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
कर्पूरगौरं (शिव स्तुति) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से सोमवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
कर्पूरगौरं (शिव स्तुति) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
कर्पूरगौरं (शिव स्तुति) का अर्थ क्या है?
कपूर जैसे गोरे, करुणा के अवतार, संसार के सार, साँपों का हार पहनने वाले, जो सदा हृदय-कमल में बसते हैं, उन भगवान शिव को माता पार्वती सहित मैं नमस्कार करता हूँ।
