श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:06 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
होम › त्योहार › अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया

अगली बार: रविवार, 9 मई 2027 (189 दिन बाद)

अक्षय तृतीया 2027 kab hai? 9 May 2027, Sunday (Ravivar).

वैशाख शुक्ल तृतीया को किया गया दान-पुण्य अक्षय माना जाता है। यह दिन शुभ कार्यों के लिए विशेष माना जाता है।

शुभ मुहूर्त: रविवार, 9 मई 2027

तृतीया तिथि8 मई, 11:43 AM से 9:03 AM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
अभिजीत मुहूर्त11:50 AM से 12:44 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल5:20 PM से 7:00 PM
यमगंड12:17 PM से 1:58 PM

सूर्योदय 5:34 AM, सूर्यास्त 7:00 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

अक्षय तृतीया के वॉलपेपर और शुभकामना कार्ड

HD डाउनलोड करें या अपना नाम लगाकर WhatsApp स्टेटस के लिए कार्ड बनाएँ।

अक्षय तृतीया के मंत्र

माँ लक्ष्मी

लक्ष्मी मूल मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ।
महालक्ष्मी मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ।
श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः ॥
लक्ष्मी गायत्री मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि ।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥

माँ लक्ष्मी के सभी मंत्र →

भगवान विष्णु

वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।
नारायण अष्टाक्षर मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नमो नारायणाय ।
विष्णु गायत्री मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

भगवान विष्णु के सभी मंत्र →

माँ लक्ष्मी की पूजा विधि

  1. घर और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ़ करें।
  2. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी और गणेश जी स्थापित करें।
  3. कलश स्थापना करें और दीपक जलाएँ।
  4. कमल या लाल फूल, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें, खीर या मिठाई का भोग लगाएँ।
  5. लक्ष्मी मंत्र और चालीसा का पाठ करके आरती करें।

पूजा सामग्री

  • लाल कपड़ा और चौकी
  • कलश
  • कमल या लाल फूल
  • कुमकुम
  • अक्षत
  • घी का दीपक
  • खीर या मिठाई
  • सिक्के
  • धूप

सवाल-जवाब

अक्षय तृतीया 2027 कब है?

अक्षय तृतीया 2027 में 9 मई 2027, रविवार को है।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।