विष्णु गायत्री मंत्र
भगवान विष्णु · गुरुवार
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
Om narayanaya vidmahe vasudevaya dhimahi |
tanno vishnuh prachodayat ||
अर्थ
हम नारायण को जानें, वासुदेव का ध्यान करें; वे भगवान विष्णु हमें प्रेरित करें।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
गुरुवार और एकादशी पर इसका जाप शुभ माना जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
विष्णु गायत्री मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
विष्णु गायत्री मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
विष्णु गायत्री मंत्र का अर्थ क्या है?
हम नारायण को जानें, वासुदेव का ध्यान करें; वे भगवान विष्णु हमें प्रेरित करें।
