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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:01 PMIST
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ॐ जय जगदीश हरे

भगवान विष्णु · आरती

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आरती

ॐ जय जगदीश हरे

भगवान विष्णु
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ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

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ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का, स्वामी दुःख बिनसे मन का।
सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी, स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसकी॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता, स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख फलकामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

दीनबन्धु दुःखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी रक्षक तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Om jay jagadish hare, svami jay jagadish hare|
bhakta janon ke sankat, das janon ke sankat, kshan men dur kare||

jo dhyave phal pave, duhkh binase man ka, svami duhkh binase man ka|
sukh sampati ghar ave, kashta mite tan ka||

mat pita tum mere, sharan gahun main kisaki, svami sharan gahun main kisaki|
tum bin aur na duja, as karun main jisaki||

tum puran paramatma, tum antaryami, svami tum antaryami|
parabrahma parameshvar, tum sab ke svami||

tum karuna ke sagar, tum palanakarta, svami tum palanakarta|
main murakh phalakami, main sevak tum svami, kripa karo bharta||

tum ho ek agochar, sabake pranapati, svami sabake pranapati|
kis vidhi milun dayamay, tumako main kumati||

dinabandhu duhkhaharta, thakur tum mere, svami rakshak tum mere|
apane hath uthao, apani sharan lagao, dvar para tere||

vishay vikar mitao, pap haro deva, svami pap haro deva|
shraddha bhakti barhao, santan ki seva||

Om jay jagadish hare, svami jay jagadish hare|
bhakta janon ke sankat, das janon ke sankat, kshan men dur kare||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

भगवान विष्णु की सबसे प्रसिद्ध आरती, जो लगभग हर पूजा के अंत में गाई जाती है।

महत्व

किसी भी पूजा के समापन पर गाई जाती है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. गुरुवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।

सवाल-जवाब

यह आरती कब गाई जाती है?

लगभग हर पूजा, कथा और त्योहार के अंत में "ॐ जय जगदीश हरे" आरती गाई जाती है। यह भगवान विष्णु की आरती है।

आरती कैसे करें?

घी या कपूर के दीपक को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ, फिर सबको आरती दें।