परिचय
भगवान विष्णु की सबसे प्रसिद्ध आरती, जो लगभग हर पूजा के अंत में गाई जाती है।
महत्व
किसी भी पूजा के समापन पर गाई जाती है।
पाठ विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
- घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
- पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
- आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
- गुरुवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।
सवाल-जवाब
यह आरती कब गाई जाती है?
लगभग हर पूजा, कथा और त्योहार के अंत में "ॐ जय जगदीश हरे" आरती गाई जाती है। यह भगवान विष्णु की आरती है।
आरती कैसे करें?
घी या कपूर के दीपक को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएँ, फिर सबको आरती दें।
