श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:11 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
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आरती श्री सत्यनारायण जी

भगवान विष्णु · आरती

🪔 दीपक, घंटी के साथ ऑनलाइन आरती करें

आरती

आरती श्री सत्यनारायण जी

भगवान विष्णु
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आरती श्री सत्यनारायण जी

जय लक्ष्मीरमणा, श्री जय लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥

रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥

प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो॥

दुर्बल भील कठारो इन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी॥

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।
सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर स्तुति कीनी॥

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जय लक्ष्मीरमणा, श्री जय लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥

रत्नजड़ित सिंहासन अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराजन घंटा ध्वनि बाजे॥

प्रगट भये कलि कारण द्विज को दर्श दियो।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर कंचन महल कियो॥

दुर्बल भील कठारो इन पर कृपा करी।
चन्द्रचूड़ एक राजा जिनकी विपति हरी॥

वैश्य मनोरथ पायो श्रद्धा तज दीनी।
सो फल भोग्यो प्रभुजी फिर स्तुति कीनी॥

भाव भक्ति के कारण छिन छिन रूप धर्यो।
श्रद्धा धारण कीनी तिनको काज सर्यो॥

ग्वाल बाल संग राजा वन में भक्ति करी।
मनवांछित फल दीनो दीनदयाल हरी॥

चढ़त प्रसाद सवायो कदली फल मेवा।
धूप दीप तुलसी से राजी सत्यदेवा॥

श्री सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

jay lakshmiramana, shri jay lakshmiramana|
satyanarayan svami janapatak harana||

ratnajarit sinhasan adbhut chhavi raje|
narad karat nirajan ghanta dhvani baje||

pragat bhaye kali karan dvij ko darsha diyo|
burho brahman banakar kanchan mahal kiyo||

durbal bhil katharo in par kripa kari|
chandrachura ek raja jinaki vipati hari||

vaishya manorath payo shraddha taj dini|
so phal bhogyo prabhuji phir stuti kini||

bhav bhakti ke karan chhin chhin rup dharyo|
shraddha dharan kini tinako kaj saryo||

gval bal sang raja van men bhakti kari|
manavanchhit phal dino dinadayal hari||

charhat prasad savayo kadali phal meva|
dhup dip tulasi se raji satyadeva||

shri satyanarayanaji ki arati jo koi nar gave|
kahat shivananda svami manavanchhit phal pave||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

सत्यनारायण व्रत कथा के बाद गाई जाने वाली आरती।

महत्व

पूर्णिमा और सत्यनारायण पूजा में।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. गुरुवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।