श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:10 PMIST
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शिवरामाष्टकम्

भगवान विष्णु · स्तोत्र

स्तोत्र

शिवरामाष्टकम्

भगवान विष्णु
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शिवरामाष्टकम्

शिवहरे शिवराम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे विभो।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१॥

कमललोचन राम दयानिधे हर गुरो गजरक्षक गोपते।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥२॥

स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर भजति तं पुरुषं परं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥३॥

जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥४॥

भवविमोचन माधव मापते सुकविमानसहंस शिवारते।
जनकजारत माधव रक्ष मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥५॥

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शिवहरे शिवराम सखे प्रभो त्रिविधतापनिवारण हे विभो।
अज जनेश्वर यादव पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१॥

कमललोचन राम दयानिधे हर गुरो गजरक्षक गोपते।
शिवतनो भव शङ्कर पाहि मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥२॥

स्वजनरञ्जन मङ्गलमन्दिर भजति तं पुरुषं परं पदम्।
भवति तस्य सुखं परमाद्भुतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥३॥

जय युधिष्ठिरवल्लभ भूपते जय जयार्जितपुण्यपयोनिधे।
जय कृपामय कृष्ण नमोऽस्तु ते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥४॥

भवविमोचन माधव मापते सुकविमानसहंस शिवारते।
जनकजारत माधव रक्ष मां शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥५॥

अवनिमण्डलमङ्गल मापते जलदसुन्दर राम रमापते।
निगमकीर्तिगुणार्णव गोपते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥६॥

पतितपावननाममयी लता तव यशो विमलं परिगीयते।
तदपि माधव मां किमुपेक्षसे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥७॥

अमरतापरदेव रमापते विनयतस्तव नामधनोपमम्।
मयि कथं करुणार्णव जायते शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥८॥

हनुमतः प्रिय चापकर प्रभो सुरसरिद्धृतशेखर हे गुरो।
मम विभो किमु विस्मरणं कृतं शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥९॥

नरहरेति परं जनसुन्दरं पठति यः शिवरामकृतस्तवम्।
विशति रामरमाचरणाम्बुजे शिव हरे विजयं कुरु मे वरम् ॥१०॥

प्रातरुत्थाय यो भक्त्या पठेदेकाग्रमानसः।
विजयो जायते तस्य विष्णुसान्निध्यमाप्नुयात् ॥११॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

shivahare shivarama sakhe prabho trividhatapanivarana he vibho|
aja janeshvara yadava pahi mam shiva hare vijayam kuru me varam ||1||

kamalalochana rama dayanidhe hara guro gajarakshaka gopate|
shivatano bhava shankara pahi mam shiva hare vijayam kuru me varam ||2||

svajanaranjana mangalamandira bhajati tam purusham param padam|
bhavati tasya sukham paramadbhutam shiva hare vijayam kuru me varam ||3||

jaya yudhishthiravallabha bhupate jaya jayarjitapunyapayonidhe|
jaya kripamaya krishna namo'stu te shiva hare vijayam kuru me varam ||4||

bhavavimochana madhava mapate sukavimanasahansa shivarate|
janakajarata madhava raksha mam shiva hare vijayam kuru me varam ||5||

avanimandalamangala mapate jaladasundara rama ramapate|
nigamakirtigunarnava gopate shiva hare vijayam kuru me varam ||6||

patitapavananamamayi lata tava yasho vimalam parigiyate|
tadapi madhava mam kimupekshase shiva hare vijayam kuru me varam ||7||

amarataparadeva ramapate vinayatastava namadhanopamam|
mayi katham karunarnava jayate shiva hare vijayam kuru me varam ||8||

hanumatah priya chapakara prabho surasariddhritashekhara he guro|
mama vibho kimu vismaranam kritam shiva hare vijayam kuru me varam ||9||

narahareti param janasundaram pathati yah shivaramakritastavam|
vishati ramaramacharanambuje shiva hare vijayam kuru me varam ||10||

pratarutthaya yo bhaktya pathedekagramanasah|
vijayo jayate tasya vishnusannidhyamapnuyat ||11||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

शिव और राम (हरि) दोनों को एक साथ पुकारने वाली स्तुति।

महत्व

सुबह उठकर पढ़ने का विधान है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद भगवान विष्णु का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. गुरुवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।