मङ्गलम् भगवान विष्णुः
भगवान विष्णु · गुरुवार
मङ्गलं भगवान् विष्णुः मङ्गलं गरुडध्वजः ।
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनो हरिः ॥
मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः मङ्गलायतनो हरिः ॥
mangalam bhagavan vishnuh mangalam garudadhvajah |
mangalam pundarikakshah mangalayatano harih ||
अर्थ
भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ ध्वज वाले मंगलमय हैं, कमल नयन मंगलमय हैं, श्री हरि मंगल के धाम हैं।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
विवाह, गृह प्रवेश और हर शुभ काम में यह श्लोक बोला जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
मङ्गलम् भगवान विष्णुः कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
मङ्गलम् भगवान विष्णुः कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
मङ्गलम् भगवान विष्णुः का अर्थ क्या है?
भगवान विष्णु मंगलमय हैं, गरुड़ ध्वज वाले मंगलमय हैं, कमल नयन मंगलमय हैं, श्री हरि मंगल के धाम हैं।
