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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:44 PMIST
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शान्ताकारं (विष्णु ध्यान)

भगवान विष्णु · गुरुवार

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

shantakaram bhujagashayanam padmanabham suresham
vishvadharam gaganasadrisham meghavarnam shubhangam |
lakshmikantam kamalanayanam yogibhirdhyanagamyam
vande vishnum bhavabhayaharam sarvalokaikanatham ||

अर्थ

शांत रूप वाले, शेषनाग पर लेटे, नाभि में कमल वाले, देवताओं के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश जैसे व्यापक, बादल जैसे श्याम, सुंदर अंगों वाले, लक्ष्मी पति, कमल नयन, योगियों के ध्यान में आने वाले, संसार का भय हरने वाले, सब लोकों के एकमात्र स्वामी भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

विष्णु पूजा और सत्यनारायण कथा की शुरुआत में यह ध्यान श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
  6. जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

शान्ताकारं (विष्णु ध्यान) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

शान्ताकारं (विष्णु ध्यान) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।

शान्ताकारं (विष्णु ध्यान) का अर्थ क्या है?

शांत रूप वाले, शेषनाग पर लेटे, नाभि में कमल वाले, देवताओं के स्वामी, विश्व के आधार, आकाश जैसे व्यापक, बादल जैसे श्याम, सुंदर अंगों वाले, लक्ष्मी पति, कमल नयन, योगियों के ध्यान में आने वाले, संसार का भय हरने वाले, सब लोकों के एकमात्र स्वामी भगवान विष्णु की मैं वंदना करता हूँ।

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