वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र
भगवान विष्णु · गुरुवार
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।
Om namo bhagavate vasudevaya |
अर्थ
भगवान वासुदेव (विष्णु और श्री कृष्ण) को नमस्कार। इसमें बारह अक्षर हैं, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
गुरुवार, एकादशी और रोज़ की पूजा में इसका जाप सबसे प्रचलित है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; पीला रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूर्व दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; गुरुवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद चने की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से गुरुवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र का अर्थ क्या है?
भगवान वासुदेव (विष्णु और श्री कृष्ण) को नमस्कार। इसमें बारह अक्षर हैं, इसलिए इसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं।
