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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:07 PMIST
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महालक्ष्मी अष्टकम्

माँ लक्ष्मी · स्तोत्र · पद्म पुराण (इन्द्र कृत)

स्तोत्र

महालक्ष्मी अष्टकम्

माँ लक्ष्मी
रचना: पद्म पुराण (इन्द्र कृत)
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महालक्ष्मी अष्टकम्

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥१॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥२॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥३॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥४॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥५॥

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नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥१॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥२॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥३॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥४॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥५॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥६॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥७॥

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥८॥

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥९॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः ॥१०॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥११॥

॥इति इन्द्रकृत श्रीमहालक्ष्म्यष्टकं सम्पूर्णम्॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

namaste'stu mahamaye shripithe surapujite|
shankhachakragadahaste mahalakshmi namo'stu te ||1||

namaste garudarudhe kolasurabhayankari|
sarvapapahare devi mahalakshmi namo'stu te ||2||

sarvagye sarvavarade sarvadushtabhayankari|
sarvaduhkhahare devi mahalakshmi namo'stu te ||3||

siddhibuddhiprade devi bhuktimuktipradayini|
mantramurte sada devi mahalakshmi namo'stu te ||4||

adyantarahite devi adyashakti maheshvari|
yogaje yogasambhute mahalakshmi namo'stu te ||5||

sthulasukshmamaharaudre mahashakti mahodare|
mahapapahare devi mahalakshmi namo'stu te ||6||

padmasanasthite devi parabrahmasvarupini|
parameshi jaganmatarmahalakshmi namo'stu te ||7||

shvetambaradhare devi nanalankarabhushite|
jagatsthite jaganmatarmahalakshmi namo'stu te ||8||

mahalakshmyashtakam stotram yah pathedbhaktimannarah|
sarvasiddhimavapnoti rajyam prapnoti sarvada ||9||

ekakale pathennityam mahapapavinashanam|
dvikalam yah pathennityam dhanadhanyasamanvitah ||10||

trikalam yah pathennityam mahashatruvinashanam|
mahalakshmirbhavennityam prasanna varada shubha ||11||

||iti indrakrita shrimahalakshmyashtakam sampurnam||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

इन्द्र द्वारा की गई माँ महालक्ष्मी की आठ श्लोकों वाली स्तुति, साथ में फलश्रुति।

महत्व

शुक्रवार और दीपावली पर पढ़ा जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और माँ लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद माँ लक्ष्मी का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. शुक्रवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।