श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:03 PMIST
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लक्ष्मी आरती

माँ लक्ष्मी · आरती

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आरती

लक्ष्मी आरती

माँ लक्ष्मी
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लक्ष्मी आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

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ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥

उमा रमा ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Om jay lakshmi mata, maiya jay lakshmi mata|
tumako nishadin sevat, hari vishnu vidhata||

uma rama brahmani, tum hi jag-mata|
surya-chandrama dhyavat, narad rishi gata||

durga rup niranjani, sukh sampatti data|
jo koi tumako dhyavat, riddhi-siddhi dhan pata||

tum patal-nivasini, tum hi shubhadata|
karma-prabhav-prakashini, bhavanidhi ki trata||

jis ghar men tum rahatin, sab sadgun ata|
sab sambhav ho jata, man nahin ghabarata||

tum bin yagya na hote, vastra na koi pata|
khan-pan ka vaibhav, sab tumase ata||

shubh-gun mandir sundar, kshirodadhi-jata|
ratna chaturdash tum bin, koi nahin pata||

mahalakshmiji ki arati, jo koi jan gata|
ur ananda samata, pap utar jata||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

माँ लक्ष्मी की आरती।

महत्व

शुक्रवार और दीपावली पर।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और माँ लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. शुक्रवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।