श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:00 PMIST
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लक्ष्मी चालीसा

माँ लक्ष्मी · चालीसा · रामदास (चालीसा में नाम)

चालीसा

लक्ष्मी चालीसा

माँ लक्ष्मी
रचना: रामदास (चालीसा में नाम)
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लक्ष्मी चालीसा
दोहा

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका॥

चौपाई

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

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दोहा

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका॥

चौपाई

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट न होई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दीजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥

दोहा

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Doha

matu lakshmi kari kripa, karo hriday men vas|
manokamana siddha kari, puravahu meri as||

Soratha

yahi mor aradas, hath jora vinati karun|
sab vidhi karau suvas, jay janani jagadambika||

Chaupai

sindhu suta main sumirau tohi| gyan, buddhi, vidya do mohi||
tum saman nahin koi upakari| sab vidhi puravahu as hamari||
jay jay jagat janani jagadamba| sabaki tum hi ho avalamba||
tum hi ho sab ghat ghat vasi| vinati yahi hamari khasi||
jagajanani jay sindhu kumari| dinan ki tum ho hitakari||
vinavaun nitya tumahin maharani| kripa karau jag janani bhavani||
kehi vidhi stuti karaun tihari| sudhi lijai aparadh bisari||
kripa drishti chitavavo mam ori| jagajanani vinati sun mori||
gyan buddhi jay sukh ki data| sankat haro hamari mata||
kshirasindhu jab vishnu mathayo| chaudah ratna sindhu men payo||
chaudah ratna men tum sukharasi| seva kiyo prabhu bani dasi||
jab jab janma jahan prabhu linha| rup badal tahan seva kinha||
svayan vishnu jab nar tanu dhara| linheu avadhapuri avatara||
tab tum pragat janakapur mahin| seva kiyo hriday pulakahin||
apanaya tohi antaryami| vishva vidit tribhuvan ki svami||
tum sam prabal shakti nahin ani| kahan lau mahima kahaun bakhani||
man kram vachan karai sevakai| man ichchhit vanchhit phal pai||
taji chhal kapat aur chaturai| pujahin vividh bhanti manalai||
aur hal main kahaun bujhai| jo yah path karai man lai||
tako koi kashta na hoi| man ichchhit pavai phal soi||
trahi trahi jay duhkh nivarini| trividh tap bhav bandhan harini||
jo chalisa parhai parhavai| dhyan lagakar sunai sunavai||
takau koi na rog satavai| putra adi dhan sampatti pavai||
putrahin aru sampati hina| andha badhir korhi ati dina||
vipra bolay kai path karavai| shanka dil men kabhi na lavai||
path karavai din chalisa| ta par kripa karain gaurisa||
sukh sampatti bahut si pavai| kami nahin kahu ki avai||
barah mas karai jo puja| tehi sam dhanya aur nahin duja||
pratidin path karai man mahi| un sam koi jag men kahun nahin||
bahuvidhi kya main karaun barai| ley pariksha dhyan lagai||
kari vishvas karai vrat nema| hoy siddha upajai ur prema||
jay jay jay lakshmi bhavani| sab men vyapit ho gun khani||
tumharo tej prabal jag mahin| tum sam kou dayalu kahun nahin||
mohi anath ki sudhi ab lijai| sankat kati bhakti mohi dijai||
bhul chuk kari kshama hamari| darshan dijai dasha nihari||
bin darshan vyakul adhikari| tumahi achhat duhkh sahate bhari||
nahin mohin gyan buddhi hai tan men| sab janat ho apane man men||
rup chaturbhuj karake dharan| kashta mor ab karahu nivaran||
kehi prakar main karaun barai| gyan buddhi mohi nahin adhikai||

Doha

trahi trahi duhkh harini, haro vegi sab tras|
jayati jayati jay lakshmi, karo shatru ko nash||

ramadas dhari dhyan nit, vinay karat kar jor|
matu lakshmi das par, karahu daya ki kor||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

धन और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी की स्तुति।

महत्व

शुक्रवार और दीपावली पर इसका पाठ किया जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और माँ लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद माँ लक्ष्मी का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. शुक्रवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।

सवाल-जवाब

लक्ष्मी चालीसा कब पढ़ें?

शुक्रवार, दिवाली, धनतेरस और शरद पूर्णिमा पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।

कैसे पढ़ें?

शाम को घर साफ़ करके, माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर, कमल या लाल फूल अर्पित करके पाठ करें।