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विजया एकादशी व्रत कथा

अगली विजया एकादशी: 3 मार्च 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 4 मार्च को 2:02 PM से 4:02 PM के बीच। वैष्णव परंपरा में व्रत 4 मार्च को। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

विजया एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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विजया एकादशी व्रत कथा
विजया एकादशी व्रत कथा

लंका जाने से पहले भगवान श्री राम अपनी सेना के साथ समुद्र के किनारे पहुँचे, पर विशाल समुद्र पार करने का उपाय नहीं सूझ रहा था।

लक्ष्मण जी की सलाह पर वे पास ही रहने वाले बकदाल्भ्य मुनि के पास गए। मुनि ने फाल्गुन कृष्ण एकादशी, यानी विजया एकादशी का व्रत करने को कहा।

श्री राम ने कलश स्थापित करके विधि से यह व्रत किया। इसके प्रभाव से समुद्र पर सेतु बना और उन्हें रावण पर विजय मिली।

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विजया एकादशी व्रत कथा लंका जाने से पहले भगवान श्री राम अपनी सेना के साथ समुद्र के किनारे पहुँचे, पर विशाल समुद्र पार करने का उपाय नहीं सूझ रहा था।

लक्ष्मण जी की सलाह पर वे पास ही रहने वाले बकदाल्भ्य मुनि के पास गए। मुनि ने फाल्गुन कृष्ण एकादशी, यानी विजया एकादशी का व्रत करने को कहा।

श्री राम ने कलश स्थापित करके विधि से यह व्रत किया। इसके प्रभाव से समुद्र पर सेतु बना और उन्हें रावण पर विजय मिली।

इसीलिए किसी कठिन काम में सफलता के लिए इस एकादशी का व्रत करने की परंपरा है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी, विजया एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

विजया एकादशी कब है?

3 मार्च 2027 (बुधवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 4 मार्च को 2:02 PM से 4:02 PM के बीच। वैष्णव परंपरा में व्रत 4 मार्च को।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।