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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

अगली उत्पन्ना एकादशी: 4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 5 दिसंबर को 6:59 AM से 9:04 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा
उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा

सतयुग में मुर नाम का एक बलवान दैत्य था, जिसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने उससे बहुत समय तक युद्ध किया।

युद्ध के बीच थककर भगवान बदरिकाश्रम की हेमवती गुफा में विश्राम करने चले गए। मुर उनका पीछा करते हुए वहाँ पहुँचा और सोते हुए भगवान पर वार करना चाहा।

उसी क्षण भगवान के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर का वध कर दिया। जागने पर भगवान ने प्रसन्न होकर उसका नाम एकादशी रखा, क्योंकि वह मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी।

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उत्पन्ना एकादशी व्रत कथा सतयुग में मुर नाम का एक बलवान दैत्य था, जिसने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया था। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने उससे बहुत समय तक युद्ध किया।

युद्ध के बीच थककर भगवान बदरिकाश्रम की हेमवती गुफा में विश्राम करने चले गए। मुर उनका पीछा करते हुए वहाँ पहुँचा और सोते हुए भगवान पर वार करना चाहा।

उसी क्षण भगवान के शरीर से एक तेजस्वी कन्या प्रकट हुई, जिसने मुर का वध कर दिया। जागने पर भगवान ने प्रसन्न होकर उसका नाम एकादशी रखा, क्योंकि वह मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी को प्रकट हुई थी।

भगवान ने वर दिया कि जो इस तिथि को श्रद्धा से व्रत रखेगा, उसके पाप नष्ट होंगे। इसलिए एकादशी व्रत की शुरुआत उत्पन्ना एकादशी से करने की परंपरा है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की एकादशी, उत्पन्ना एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

उत्पन्ना एकादशी कब है?

4 दिसंबर 2026 (शुक्रवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 5 दिसंबर को 6:59 AM से 9:04 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।