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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

अगली मोक्षदा एकादशी: 20 दिसंबर 2026 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 21 दिसंबर को 7:09 AM से 9:13 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा
मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

चंपक नगर में वैखानस नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। एक रात उन्होंने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं।

दुखी राजा ने विद्वानों से उपाय पूछा। वे पर्वत नाम के एक त्रिकालदर्शी मुनि के पास गए, जिन्होंने बताया कि पिता अपने पिछले कर्मों के कारण कष्ट में हैं।

मुनि ने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, यानी मोक्षदा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य पिता को अर्पित करने को कहा। राजा ने परिवार सहित विधि से व्रत किया और पुण्य पिता को दिया।

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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा चंपक नगर में वैखानस नाम के एक धर्मात्मा राजा थे। एक रात उन्होंने स्वप्न में देखा कि उनके पिता नरक में कष्ट भोग रहे हैं।

दुखी राजा ने विद्वानों से उपाय पूछा। वे पर्वत नाम के एक त्रिकालदर्शी मुनि के पास गए, जिन्होंने बताया कि पिता अपने पिछले कर्मों के कारण कष्ट में हैं।

मुनि ने मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, यानी मोक्षदा एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य पिता को अर्पित करने को कहा। राजा ने परिवार सहित विधि से व्रत किया और पुण्य पिता को दिया।

उस पुण्य से उनके पिता को मुक्ति मिली और उन्होंने आकाश से पुत्र को आशीर्वाद दिया। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी, मोक्षदा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

मोक्षदा एकादशी कब है?

20 दिसंबर 2026 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 21 दिसंबर को 7:09 AM से 9:13 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।