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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

अगली श्रावण पुत्रदा एकादशी: 12 अगस्त 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 13 अगस्त को 1:45 PM से 4:24 PM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

माहिष्मती नगरी के राजा महीजित धर्मात्मा थे, पर उनके कोई संतान नहीं थी। प्रजा भी इससे दुखी थी।

मंत्री और प्रजाजन वन में लोमश ऋषि के पास गए। ऋषि ने बताया कि पिछले जन्म में राजा ने एक प्यासी गाय को पानी पीने से हटा दिया था, उसी का यह फल है।

ऋषि के कहने पर प्रजा ने श्रावण शुक्ल एकादशी, यानी पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा को अर्पित किया।

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श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा माहिष्मती नगरी के राजा महीजित धर्मात्मा थे, पर उनके कोई संतान नहीं थी। प्रजा भी इससे दुखी थी।

मंत्री और प्रजाजन वन में लोमश ऋषि के पास गए। ऋषि ने बताया कि पिछले जन्म में राजा ने एक प्यासी गाय को पानी पीने से हटा दिया था, उसी का यह फल है।

ऋषि के कहने पर प्रजा ने श्रावण शुक्ल एकादशी, यानी पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य राजा को अर्पित किया।

इसके प्रभाव से रानी को पुत्र प्राप्त हुआ। संतान सुख के लिए यह व्रत करने की परंपरा है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी, श्रावण पुत्रदा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

श्रावण पुत्रदा एकादशी कब है?

12 अगस्त 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 13 अगस्त को 1:45 PM से 4:24 PM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।