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परमा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

परमा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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परमा एकादशी व्रत कथा
परमा एकादशी व्रत कथा

कांपिल्य नगर में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ बहुत गरीबी में रहता था, पर दोनों सदा अतिथि का सत्कार करते थे।

गरीबी से दुखी होकर सुमेधा परदेस जाने की सोचने लगा, पर पत्नी ने भाग्य और भगवान पर भरोसा रखने को कहा।

एक दिन कौण्डिन्य ऋषि उनके घर आए। ऋषि ने उन्हें अधिक मास की कृष्ण एकादशी, यानी परमा एकादशी का व्रत करने को कहा।

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परमा एकादशी व्रत कथा कांपिल्य नगर में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी पवित्रा के साथ बहुत गरीबी में रहता था, पर दोनों सदा अतिथि का सत्कार करते थे।

गरीबी से दुखी होकर सुमेधा परदेस जाने की सोचने लगा, पर पत्नी ने भाग्य और भगवान पर भरोसा रखने को कहा।

एक दिन कौण्डिन्य ऋषि उनके घर आए। ऋषि ने उन्हें अधिक मास की कृष्ण एकादशी, यानी परमा एकादशी का व्रत करने को कहा।

दोनों ने श्रद्धा से व्रत किया, और उनके घर सुख-समृद्धि आ गई। यह व्रत भी अधिक मास में ही आता है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

अधिक मास कृष्ण पक्ष की एकादशी, परमा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

परमा एकादशी कब आती है?

यह एकादशी अधिक मास में ही आती है, जो लगभग तीन साल में एक बार पड़ता है।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।