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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

अगली पापमोचनी एकादशी: 2 अप्रैल 2027 (शुक्रवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 3 अप्रैल को 1:39 PM से 4:09 PM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा
पापमोचनी एकादशी व्रत कथा

चैत्ररथ वन में मेधावी नाम के ऋषि तपस्या करते थे। मंजुघोषा नाम की अप्सरा ने अपने नृत्य-गान से उनका ध्यान भंग कर दिया, और वे वर्षों तक उसके साथ रहे।

जब ऋषि को अपनी भूल का एहसास हुआ, तो क्रोध में उन्होंने अप्सरा को पिशाचिनी होने का शाप दे दिया। अप्सरा ने क्षमा माँगी।

तब ऋषि ने उसे चैत्र कृष्ण एकादशी, यानी पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा। उनके पिता च्यवन ऋषि ने मेधावी को भी यही व्रत करने की सलाह दी।

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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा चैत्ररथ वन में मेधावी नाम के ऋषि तपस्या करते थे। मंजुघोषा नाम की अप्सरा ने अपने नृत्य-गान से उनका ध्यान भंग कर दिया, और वे वर्षों तक उसके साथ रहे।

जब ऋषि को अपनी भूल का एहसास हुआ, तो क्रोध में उन्होंने अप्सरा को पिशाचिनी होने का शाप दे दिया। अप्सरा ने क्षमा माँगी।

तब ऋषि ने उसे चैत्र कृष्ण एकादशी, यानी पापमोचनी एकादशी का व्रत करने को कहा। उनके पिता च्यवन ऋषि ने मेधावी को भी यही व्रत करने की सलाह दी।

दोनों ने व्रत किया। अप्सरा शाप से मुक्त हुई और ऋषि का तप फिर से लौट आया। इसे पापों से मुक्ति देने वाली एकादशी माना जाता है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी, पापमोचनी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

पापमोचनी एकादशी कब है?

2 अप्रैल 2027 (शुक्रवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 3 अप्रैल को 1:39 PM से 4:09 PM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।