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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

अगली पापांकुशा एकादशी: 11 अक्टूबर 2027 (सोमवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 12 अक्टूबर को 6:20 AM से 8:39 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था, जिसने जीवन भर हिंसा और बुरे काम किए थे।

जीवन के अंत में जब यमदूत उसे लेने आने वाले थे, तो डरकर वह अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचा और उद्धार का उपाय पूछा।

ऋषि ने उसे आश्विन शुक्ल एकादशी, यानी पापांकुशा एकादशी का व्रत करने को कहा। उसने पूरे मन से व्रत किया।

मान्यता है कि उस व्रत से उसके पाप नष्ट हुए। पापांकुशा का अर्थ है पाप रूपी हाथी पर अंकुश लगाने वाली।

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पापांकुशा एकादशी व्रत कथा विंध्य पर्वत पर क्रोधन नाम का एक बहेलिया रहता था, जिसने जीवन भर हिंसा और बुरे काम किए थे।

जीवन के अंत में जब यमदूत उसे लेने आने वाले थे, तो डरकर वह अंगिरा ऋषि के आश्रम पहुँचा और उद्धार का उपाय पूछा।

ऋषि ने उसे आश्विन शुक्ल एकादशी, यानी पापांकुशा एकादशी का व्रत करने को कहा। उसने पूरे मन से व्रत किया।

मान्यता है कि उस व्रत से उसके पाप नष्ट हुए। पापांकुशा का अर्थ है पाप रूपी हाथी पर अंकुश लगाने वाली।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी, पापांकुशा एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

पापांकुशा एकादशी कब है?

11 अक्टूबर 2027 (सोमवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 12 अक्टूबर को 6:20 AM से 8:39 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।