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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा
पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

त्रेता युग में महिष्मती के राजा कृतवीर्य के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने बहुत तप किया, पर फल नहीं मिला।

तब रानी पद्मिनी ने अनुसूया जी से उपाय पूछा। उन्होंने अधिक मास की शुक्ल एकादशी का व्रत करने को कहा, जो तीन साल में एक बार आती है।

रानी ने विधि से व्रत और जागरण किया। भगवान ने प्रसन्न होकर पुत्र का वरदान दिया।

उनका पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रबाहु) महान और पराक्रमी राजा हुआ। यह व्रत अधिक मास में ही आता है।

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पद्मिनी एकादशी व्रत कथा त्रेता युग में महिष्मती के राजा कृतवीर्य के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने बहुत तप किया, पर फल नहीं मिला।

तब रानी पद्मिनी ने अनुसूया जी से उपाय पूछा। उन्होंने अधिक मास की शुक्ल एकादशी का व्रत करने को कहा, जो तीन साल में एक बार आती है।

रानी ने विधि से व्रत और जागरण किया। भगवान ने प्रसन्न होकर पुत्र का वरदान दिया।

उनका पुत्र कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रबाहु) महान और पराक्रमी राजा हुआ। यह व्रत अधिक मास में ही आता है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

अधिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी, पद्मिनी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

पद्मिनी एकादशी कब आती है?

यह एकादशी अधिक मास में ही आती है, जो लगभग तीन साल में एक बार पड़ता है।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।