श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:17 PMIST
रामकृपासनातन भक्ति का संपूर्ण संग्रह
होम › व्रत कथा › मोहिनी एकादशी व्रत कथा

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

अगली मोहिनी एकादशी: 16 मई 2027 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 17 मई को 5:29 AM से 8:12 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

मोहिनी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
पन्ना पलटें →
मोहिनी एकादशी व्रत कथा
मोहिनी एकादशी व्रत कथा

भद्रावती नगरी में धनपाल नाम के धर्मात्मा वैश्य रहते थे। उनका सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि बुरी संगत में पड़कर सारा धन उड़ाने लगा, इसलिए उन्होंने उसे घर से निकाल दिया।

भटकते-भटकते वह कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम पहुँचा और अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा।

ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल एकादशी, यानी मोहिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। उसने श्रद्धा से व्रत किया, और उसका जीवन बदल गया।

पन्ना 1–2 / 5
पूरा पाठ एक पेज पर पढ़ें

मोहिनी एकादशी व्रत कथा भद्रावती नगरी में धनपाल नाम के धर्मात्मा वैश्य रहते थे। उनका सबसे छोटा बेटा धृष्टबुद्धि बुरी संगत में पड़कर सारा धन उड़ाने लगा, इसलिए उन्होंने उसे घर से निकाल दिया।

भटकते-भटकते वह कौण्डिन्य ऋषि के आश्रम पहुँचा और अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा।

ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल एकादशी, यानी मोहिनी एकादशी का व्रत करने को कहा। उसने श्रद्धा से व्रत किया, और उसका जीवन बदल गया।

मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के बाद मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत पिलाया था।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी, मोहिनी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

मोहिनी एकादशी कब है?

16 मई 2027 (रविवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 17 मई को 5:29 AM से 8:12 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।