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आमलकी एकादशी व्रत कथा

अगली आमलकी एकादशी: 18 मार्च 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 19 मार्च को 7:13 AM से 8:51 AM के बीच। सभी एकादशी →

भगवान विष्णु · व्रत कथा · पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)

व्रत कथा

आमलकी एकादशी व्रत कथा

भगवान विष्णु
रचना: पौराणिक कथा (रामकृपा द्वारा सरल हिंदी सार)
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आमलकी एकादशी व्रत कथा
आमलकी एकादशी व्रत कथा

वैदिश नगर में चैत्ररथ नाम के राजा थे, जिनकी पूरी प्रजा एकादशी का व्रत करती थी। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को राजा और प्रजा ने मंदिर में आँवले के वृक्ष की पूजा करके रात भर जागरण किया।

उसी रात एक भूखा शिकारी वहाँ आ गया। भोजन की आशा में वह भी रात भर बैठा रहा और भगवान की कथा-कीर्तन सुनता रहा।

अगले जन्म में वही शिकारी राजा वसुरथ बना। एक बार म्लेच्छों ने उस पर हमला किया, तब उसके शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उसकी रक्षा की।

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आमलकी एकादशी व्रत कथा वैदिश नगर में चैत्ररथ नाम के राजा थे, जिनकी पूरी प्रजा एकादशी का व्रत करती थी। फाल्गुन शुक्ल एकादशी को राजा और प्रजा ने मंदिर में आँवले के वृक्ष की पूजा करके रात भर जागरण किया।

उसी रात एक भूखा शिकारी वहाँ आ गया। भोजन की आशा में वह भी रात भर बैठा रहा और भगवान की कथा-कीर्तन सुनता रहा।

अगले जन्म में वही शिकारी राजा वसुरथ बना। एक बार म्लेच्छों ने उस पर हमला किया, तब उसके शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उसकी रक्षा की।

उसे बताया गया कि यह पिछले जन्म की आमलकी एकादशी के जागरण का फल है। इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है।

व्रत की सामान्य विधि दशमी की रात हल्का सात्त्विक भोजन करें और एकादशी की सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, धूप-दीप और फल अर्पित करके कथा सुनें या पढ़ें। दिन भर अन्न न खाएँ; स्वास्थ्य के अनुसार फल, दूध या केवल जल लें। रात को भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी को पारण के समय में ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन-दान देकर व्रत खोलें।

परिचय

फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी, आमलकी एकादशी की कथा और व्रत विधि, सरल हिंदी में।

महत्व

पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस व्रत और कथा से पापों का नाश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

सवाल-जवाब

आमलकी एकादशी कब है?

18 मार्च 2027 (गुरुवार) को, दिल्ली के समय से। पारण 19 मार्च को 7:13 AM से 8:51 AM के बीच।

एकादशी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

परंपरा में एकादशी पर चावल और अनाज नहीं खाए जाते। फल, दूध, दही, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू और सेंधा नमक लिया जा सकता है। निर्जला व्रत में जल भी नहीं लिया जाता। स्वास्थ्य ठीक न हो तो अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।