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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:40 PMIST
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मंगल नवग्रह मंत्र (पौराणिक)

मंगल देव · मंगलवार

धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम् ।
कुमारं शक्तिहस्तं तं मङ्गलं प्रणमाम्यहम् ॥

dharanigarbhasambhutam vidyutkantisamaprabham |
kumaram shaktihastam tam mangalam pranamamyaham ||

अर्थ

पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न, बिजली जैसी चमक वाले, कुमार रूप, हाथ में शक्ति (भाला) लिए मंगल देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

नवग्रह शांति के पाठ में मंगल के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और मंगल देव का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; मंगलवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 10,000 बार (लगभग 93 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
  6. जाप के बाद मसूर की दाल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

मंगल नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से मंगलवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

मंगल नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 10,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।

मंगल नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?

पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न, बिजली जैसी चमक वाले, कुमार रूप, हाथ में शक्ति (भाला) लिए मंगल देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

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