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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:17 PMIST
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देवउठनी एकादशी

अगली बार: शुक्रवार, 20 नवंबर 2026 (19 दिन बाद)

Dev Uthani Ekadashi 2026 kab hai? 20 November 2026, Friday (Shukravar). Paran (दिल्ली): 21 November, 1:10 PM – 3:18 PM

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। तुलसी विवाह भी इसी समय होता है।

शुभ मुहूर्त: शुक्रवार, 20 नवंबर 2026

एकादशी तिथि7:16 AM से 21 नवंबर, 6:32 AM
तिथि का आरंभ और समाप्ति
अभिजीत मुहूर्त11:45 AM से 12:27 PM
दिन का सबसे शुभ समय

इस समय पूजा शुरू न करें

राहुकाल10:46 AM से 12:06 PM
यमगंड2:46 PM से 4:05 PM

सूर्योदय 6:47 AM, सूर्यास्त 5:25 PM। समय दिल्ली के अनुसार है; दूसरे शहर के लिए ऊपर शहर बदलें। स्थानीय पंचांग से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

व्रत पारण (व्रत खोलने का समय)

21 नवंबर, 1:10 PM से 3:18 PM (दिल्ली)

वैष्णव (इस्कॉन) परंपरा में इस बार व्रत 21 नवंबर को रखा जाएगा।

देवउठनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें

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देवउठनी एकादशी के मंत्र

वासुदेव द्वादशाक्षर मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।
नारायण अष्टाक्षर मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नमो नारायणाय ।
विष्णु गायत्री मंत्र📿 जाप करेंअर्थ →
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि ।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

भगवान विष्णु के सभी मंत्र →

भगवान विष्णु की पूजा विधि

  1. स्नान करके पीले वस्त्र पहनें।
  2. विष्णु जी या शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराएँ।
  3. पीले फूल, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें।
  4. पीली मिठाई या फल का भोग लगाएँ (तुलसी के साथ)।
  5. विष्णु मंत्र जपकर "ॐ जय जगदीश हरे" आरती करें।

पूजा सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • पंचामृत
  • चंदन
  • पीली मिठाई / केला
  • धूप-दीप
  • अक्षत

सवाल-जवाब

देवउठनी एकादशी 2026 कब है?

देवउठनी एकादशी 2026 में 20 नवंबर 2026, शुक्रवार को है। दिल्ली में पारण 21 November, 1:10 PM से 3:18 PM तक है।

Dev Uthani Ekadashi 2026 kab hai?

Dev Uthani Ekadashi 2026: 20 November 2026, Friday (Shukravar). Paran (दिल्ली): 21 November, 1:10 PM – 3:18 PM.

देवउठनी एकादशी का पारण कब करें?

पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद, हरि वासर बीतने पर और द्वादशी खत्म होने से पहले करना चाहिए। आपके शहर का सही समय ऊपर "व्रत पारण" वाले हिस्से में दिया गया है।

देवउठनी एकादशी पर देव कैसे जगाते हैं?

शाम को आँगन में गन्ने का मंडप बनाकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, और थाली या सूप बजाकर, "उठो देव, बैठो देव" जैसे पारंपरिक गीत गाकर भगवान को जगाया जाता है।

यह सामान्य पूजा विधि है। अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है।