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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:59 PMIST
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दुर्गा चालीसा

माँ दुर्गा · चालीसा · देवीदास (चालीसा में नाम)

चालीसा

दुर्गा चालीसा

माँ दुर्गा
रचना: देवीदास (चालीसा में नाम)
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दुर्गा चालीसा
चौपाई

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥

निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥

रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥

तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥

अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥

प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥

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चौपाई

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्बे दुःख हरनी॥
निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लय कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा॥
धरा रूप नरसिंह को अम्बा। प्रगट भईं फाड़कर खम्बा॥
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर-खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजे॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ सन्तन पर जब-जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप को मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावे। मोह मदादिक सब विनशावै॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥
जब लगि जियउं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो नित गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

Chaupai

namo namo durge sukh karani| namo namo ambe duhkh harani||
nirakar hai jyoti tumhari| tihun lok phaili ujiyari||
shashi lalat mukh mahavishala| netra lal bhrikuti vikarala||
rup matu ko adhik suhave| darash karat jan ati sukh pave||
tum sansar shakti lay kina| palan hetu anna dhan dina||
annapurna hui jag pala| tum hi adi sundari bala||
pralayakal sab nashan hari| tum gauri shivashankar pyari||
shiv yogi tumhare gun gaven| brahma vishnu tumhen nit dhyaven||
rup sarasvati ko tum dhara| de subuddhi rishi-munin ubara||
dhara rup narasinh ko amba| pragat bhain pharakar khamba||
raksha kar prahlad bachayo| hiranyaksha ko svarga pathayo||
lakshmi rup dharo jag mahin| shri narayan ang samahin||
kshirasindhu men karat vilasa| dayasindhu dijai man asa||
hingalaj men tumhin bhavani| mahima amit na jat bakhani||
matangi aru dhumavati mata| bhuvaneshvari bagala sukh data||
shri bhairav tara jag tarini| chhinna bhal bhav duhkh nivarini||
kehari vahan soh bhavani| langur vir chalat agavani||
kar men khappar-khadga virajai| jako dekh kal dar bhaje||
sohai astra aur trishula| jate uthat shatru hiy shula||
nagar koti men tumhin virajat| tihunlok men danka bajat||
shumbha nishumbha danav tum mare| raktabij shankhan sanhare||
mahishasur nrip ati abhimani| jehi agh bhar mahi akulani||
rup karal kalika dhara| sen sahit tum tihi sanhara||
pari garha santan par jab-jab| bhai sahay matu tum tab tab||
amarapuri aru basav loka| tab mahima sab rahen ashoka||
jvala men hai jyoti tumhari| tumhen sada pujen nar-nari||
prem bhakti se jo yash gavai| duhkh daridra nikat nahin aven||
dhyave tumhen jo nar man lai| janma-maran takau chhuti jai||
jogi sur muni kahat pukari| yog na ho bin shakti tumhari||
shankar acharaj tap kino| kam aru krodh jiti sab lino||
nishidin dhyan dharo shankar ko| kahu kal nahin sumiro tumako||
shakti rup ko maram na payo| shakti gai tab man pachhitayo||
sharanagat hui kirti bakhani| jay jay jay jagadamba bhavani||
bhai prasanna adi jagadamba| dai shakti nahin kin vilamba||
moko matu kashta ati ghero| tum bin kaun harai duhkh mero||
asha trishna nipat satave| moh madadik sab vinashavai||
shatru nash kijai maharani| sumiraun ikachit tumhen bhavani||
karo kripa he matu dayala| riddhi-siddhi de karahu nihala||
jab lagi jiyaun daya phal paun| tumharo yash main sada sunaun||
durga chalisa jo nit gavai| sab sukh bhog paramapad pavai||
devidas sharan nij jani| karahu kripa jagadamba bhavani||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

माँ दुर्गा के स्वरूप और शक्ति की स्तुति।

महत्व

नवरात्रि और अष्टमी पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद माँ दुर्गा का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. शुक्रवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।

सवाल-जवाब

दुर्गा चालीसा कब पढ़ें?

नवरात्रि में रोज़, और सामान्य दिनों में मंगलवार या शुक्रवार को पढ़ने की परंपरा है। अष्टमी पर इसका पाठ विशेष माना जाता है।

पाठ से पहले क्या करें?

स्नान करके माँ दुर्गा के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ, लाल फूल अर्पित करें और फिर एकाग्र मन से पाठ करें।