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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:02 PMIST
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दुर्गा आरती (जय अम्बे गौरी)

माँ दुर्गा · आरती

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आरती

दुर्गा आरती (जय अम्बे गौरी)

माँ दुर्गा
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दुर्गा आरती (जय अम्बे गौरी)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥

श्री अंबेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

jay ambe gauri, maiya jay shyama gauri|
tumako nishadin dhyavat, hari brahma shivari||

mang sindur virajat, tiko mrigamad ko|
ujjval se dou naina, chandravadan niko||

kanak saman kalevar, raktambar rajai|
raktapushpa gal mala, kanthan par sajai||

kehari vahan rajat, khadga khappar dhari|
sur-nar-munijan sevat, tinake dukhahari||

kanan kundal shobhit, nasagre moti|
kotik chandra divakar, sam rajat jyoti||

shumbh-nishumbh bidare, mahishasur ghati|
dhumra vilochan naina, nishadin madamati||

chanda-munda sanhare, shonit bij hare|
madhu-kaitabh dou mare, sur bhayahin kare||

brahmani, rudrani, tum kamala rani|
agam nigam bakhani, tum shiv patarani||

chaunsath yogini gavat, nritya karat bhairon|
bajat tal mridanga, aru bajat damaru||

tum hi jag ki mata, tum hi ho bharata|
bhaktan ki dukh harata, sukh sampati karata||

bhuja char ati shobhit, varamudra dhari|
manavanchhit phal pavat, sevat nar nari||

kanchan thal virajat, agar kapur bati|
shrimalaketu men rajat, koti ratan jyoti||

shri ambeji ki arati, jo koi nar gave|
kahat shivanand svami, sukh-sampati pave||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

माँ दुर्गा की प्रसिद्ध आरती।

महत्व

नवरात्रि में सुबह-शाम गाई जाती है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और माँ दुर्गा के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. शुक्रवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।