या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण
माँ लक्ष्मी · शुक्रवार
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
ya devi sarvabhuteshu lakshmirupena sansthita |
namastasyai namastasyai namastasyai namo namah ||
अर्थ
जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी (समृद्धि) के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
यह दुर्गा सप्तशती के देवी सूक्त की शैली का श्लोक है; लक्ष्मी पूजा में बोला जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; गुलाबी, सफ़ेद, लाल रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और माँ लक्ष्मी का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; शुक्रवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद चावल जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से शुक्रवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण का अर्थ क्या है?
जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी (समृद्धि) के रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कार है।
