वक्रतुण्ड महाकाय
श्री गणेश · बुधवार
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
vakratunda mahakaya suryakoti samaprabha |
nirvighnam kuru me deva sarvakaryeshu sarvada ||
अर्थ
हे टेढ़ी सूँड़ वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों जैसे तेज वाले गणेश जी! मेरे सब कामों को हमेशा बिना विघ्न के पूरा करें।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
पढ़ाई, परीक्षा, नया काम या यात्रा शुरू करने से पहले यह सबसे प्रचलित श्लोक है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; हरा रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और श्री गणेश का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; बुधवार को इसका विशेष महत्व है।
- रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
- जाप के बाद हरी मूँग जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
वक्रतुण्ड महाकाय कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से बुधवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
वक्रतुण्ड महाकाय कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।
वक्रतुण्ड महाकाय का अर्थ क्या है?
हे टेढ़ी सूँड़ वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों जैसे तेज वाले गणेश जी! मेरे सब कामों को हमेशा बिना विघ्न के पूरा करें।
