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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:09 PMIST
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ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र

श्री गणेश · स्तोत्र · कृष्णयामल तंत्र

स्तोत्र

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र

श्री गणेश
रचना: कृष्णयामल तंत्र
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ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र
ध्यान

सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम्।
ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ॥

स्तोत्र

सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥१॥

त्रिपुरस्य वधात्पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥२॥

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ध्यान

सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम्।
ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ॥

स्तोत्र

सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥१॥

त्रिपुरस्य वधात्पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥२॥

हिरण्यकश्यपादीनां वधार्थे विष्णुनार्चितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥३॥

महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥४॥

तारकस्य वधात्पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥५॥

भास्करेण गणेशो हि पूजितश्छविसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥६॥

शशिना कान्तिवृद्ध्यर्थं पूजितो गणनायकः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥७॥

पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः।
सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥८॥

फलश्रुति

इदं त्वृणहरं स्तोत्रं तीव्रदारिद्र्यनाशनम्।
एकवारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं समाहितः ॥९॥

दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेरसमतां व्रजेत् ॥१०॥
॥इति श्रीकृष्णयामलतन्त्रे उमामहेश्वरसंवादे ऋणहर्तृगणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

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Dhyan

sinduravarnam dvibhujam ganesham lambodaram padmadale nivishtam|
brahmadidevaih parisevyamanam siddhairyutam tam pranamami devam ||

Stotra

srishtyadau brahmana samyak pujitah phalasiddhaye|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||1||

tripurasya vadhatpurvam shambhuna samyagarchitah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||2||

hiranyakashyapadinam vadharthe vishnunarchitah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||3||

mahishasya vadhe devya gananathah prapujitah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||4||

tarakasya vadhatpurvam kumarena prapujitah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||5||

bhaskarena ganesho hi pujitashchhavisiddhaye|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||6||

shashina kantivriddhyartham pujito gananayakah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||7||

palanaya cha tapasam vishvamitrena pujitah|
sadaiva parvatiputrah rinanasham karotu me ||8||

Phalashruti

idam tvrinaharam stotram tivradaridryanashanam|
ekavaram pathennityam varshamekam samahitah ||9||

daridryam darunam tyaktva kuberasamatam vrajet ||10||
||iti shrikrishnayamalatantre umamaheshvarasanvade rinahartriganeshastotram sampurnam||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

शिव-पार्वती संवाद के रूप में गणेश जी से ऋण (कर्ज़) दूर करने की प्रार्थना।

महत्व

बुधवार और चतुर्थी को पढ़ने की परंपरा है।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री गणेश के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. पाठ के बाद श्री गणेश का मंत्र या आरती करके प्रसाद बाँटें।
  5. बुधवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।