श्री राम दरबार: श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी
॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:02 PMIST
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गणेश आरती (जय गणेश देवा)

श्री गणेश · आरती

🪔 दीपक, घंटी के साथ ऑनलाइन आरती करें

आरती

गणेश आरती (जय गणेश देवा)

श्री गणेश
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गणेश आरती (जय गणेश देवा)

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

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जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

सूर श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

jay ganesh jay ganesh, jay ganesh deva|
mata jaki parvati, pita mahadeva||

ek dant dayavant, char bhuja dhari|
mathe sindur sohe, muse ki savari||

pan charhe phul charhe, aur charhe meva|
ladduan ka bhog lage, sant karen seva||

andhan ko ankh det, korhin ko kaya|
banjhan ko putra det, nirdhan ko maya||

sur shyam sharan ae, saphal kije seva|
mata jaki parvati, pita mahadeva||

jay ganesh jay ganesh, jay ganesh deva|
mata jaki parvati, pita mahadeva||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

श्री गणेश की प्रसिद्ध आरती।

महत्व

हर शुभ काम की शुरुआत में।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री गणेश के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. बुधवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।