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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:33:41 PMIST
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गजाननं भूतगणादि सेवितं

श्री गणेश · बुधवार

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम् ।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम् ॥

gajananam bhutaganadisevitam kapitthajambuphalacharubhakshanam |
umasutam shokavinashakarakam namami vighneshvarapadapankajam ||

अर्थ

हाथी के मुख वाले, भूत-गणों से सेवित, कैथ और जामुन के फल प्रेम से खाने वाले, माता उमा के पुत्र, दुख दूर करने वाले विघ्नेश्वर के चरण-कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ।

लाभ (परंपरा के अनुसार)

गणेश पूजा और गणेश चतुर्थी पर यह श्लोक पढ़ा जाता है।

जाप की विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; हरा रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
  2. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और श्री गणेश का ध्यान करें।
  3. दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
  4. सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; बुधवार को इसका विशेष महत्व है।
  5. रोज़ कम से कम एक माला का नियम बनाना अच्छा माना जाता है।
  6. जाप के बाद हरी मूँग जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।

सवाल-जवाब

गजाननं भूतगणादि सेवितं कब जपना चाहिए?

रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से बुधवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।

गजाननं भूतगणादि सेवितं कितनी बार जपें?

सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार।

गजाननं भूतगणादि सेवितं का अर्थ क्या है?

हाथी के मुख वाले, भूत-गणों से सेवित, कैथ और जामुन के फल प्रेम से खाने वाले, माता उमा के पुत्र, दुख दूर करने वाले विघ्नेश्वर के चरण-कमलों को मैं नमस्कार करता हूँ।

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