बुध नवग्रह मंत्र (पौराणिक)
बुध देव · बुधवार
प्रियङ्गुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम् ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥
priyangukalikashyamam rupenapratimam budham |
saumyam saumyagunopetam tam budham pranamamyaham ||
अर्थ
प्रियंगु की कली जैसे श्याम वर्ण वाले, अनुपम रूप वाले, सौम्य और सौम्य गुणों से भरे बुध देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
लाभ (परंपरा के अनुसार)
नवग्रह शांति के पाठ में बुध के लिए यही श्लोक पढ़ा जाता है।
जाप की विधि
- स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें; हरा रंग के वस्त्र शुभ माने जाते हैं।
- उत्तर दिशा की ओर मुँह करके आसन पर बैठें और बुध देव का ध्यान करें।
- दीपक जलाकर रुद्राक्ष, तुलसी या चंदन की माला से जाप करें; एक माला में 108 बार।
- सबसे अच्छा समय सुबह सूर्योदय के आसपास है; बुधवार को इसका विशेष महत्व है।
- ग्रह शांति के संकल्प में यह जाप कुल 9,000 बार (लगभग 84 माला) कई दिनों में पूरा किया जाता है।
- जाप के बाद हरी मूँग जैसी चीज़ का दान करें और मन में प्रार्थना करके उठें।
सवाल-जवाब
बुध नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कब जपना चाहिए?
रोज़ सुबह स्नान के बाद, और विशेष रूप से बुधवार को। शांत मन और साफ़ जगह पर जाप करना अच्छा माना जाता है।
बुध नवग्रह मंत्र (पौराणिक) कितनी बार जपें?
सामान्य रूप से रोज़ एक माला यानी 108 बार। ग्रह शांति के संकल्प में कुल 9,000 जाप कई दिनों में पूरे किए जाते हैं।
बुध नवग्रह मंत्र (पौराणिक) का अर्थ क्या है?
प्रियंगु की कली जैसे श्याम वर्ण वाले, अनुपम रूप वाले, सौम्य और सौम्य गुणों से भरे बुध देव को मैं प्रणाम करता हूँ।
