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॥ श्री गणेशाय नमः ॥रविवार, 1 नवंबर 20262:34:10 PMIST
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श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन (राम स्तुति)

श्री राम · आरती · गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका)

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आरती

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन (राम स्तुति)

श्री राम
रचना: गोस्वामी तुलसीदास (विनय पत्रिका)
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श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन (राम स्तुति)

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द्र दशरथ नन्दनम्॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणम्॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम्॥

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श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥

भजु दीनबंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल चन्द्र दशरथ नन्दनम्॥

सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप धर संग्राम जित खरदूषणम्॥

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदय कंज निवास कुरु कामादि खल दल गंजनम्॥

मन जाहि राचेउ मिलहि सो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजान शील सनेह जानत रावरो॥

एहि भांति गौरि असीस सुनि सिय सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मन्दिर चली॥

🔤 Read in English (Roman lyrics)

shri ramachandra kripalu bhaju man haran bhavabhay darunam|
nav kanj lochan kanj mukh kar kanj pad kanjarunam||

kandarpa aganit amit chhavi nav nil nirad sundaram|
pat pit manahun tarit ruchi shuchi naumi janak sutavaram||

bhaju dinabandhu dinesh danav daitya vansh nikandanam|
raghunanda ananda kanda koshal chandra dasharath nandanam||

sir mukut kundal tilak charu udaru ang vibhushanam|
ajanubhuj shar chap dhar sangram jit kharadushanam||

iti vadati tulasidas shankar shesh muni man ranjanam|
mam hriday kanj nivas kuru kamadi khal dal ganjanam||

man jahi racheu milahi so var sahaj sundar sanvaro|
karuna nidhan sujan shil saneh janat ravaro||

ehi bhanti gauri asis suni siy sahit hiy harashit ali|
tulasi bhavanihi puji puni puni mudit man mandir chali||

यह पाठ देवनागरी से अपने आप रोमन अक्षरों में बदला गया है। सही उच्चारण के लिए देवनागरी पाठ को आधार मानें।

परिचय

गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका की प्रसिद्ध राम स्तुति, जो आरती के रूप में गाई जाती है।

महत्व

राम नवमी और सुंदरकांड के पाठ के बाद।

पाठ विधि

  1. स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें और श्री राम के चित्र या मूर्ति के सामने बैठें।
  2. घी का दीपक और धूप जलाएँ, फूल और भोग अर्पित करें।
  3. पहले श्री गणेश का स्मरण करें, फिर शांत मन से, स्पष्ट उच्चारण के साथ पूरा पाठ करें।
  4. आरती की थाली को भगवान के सामने घड़ी की दिशा में घुमाते हुए गाएँ, फिर सबको आरती दें।
  5. मंगलवार को इस पाठ का विशेष महत्व माना जाता है; चाहें तो 11, 21 या 40 दिन का संकल्प लेकर रोज़ पढ़ें।